Tuesday, March 10, 2009

जंगल की होली


नंदनवन में भी इस बार होली की तयारी शुरू हो गई हैं , ऊँट और जिराफ तो खुश है क्योंकि उन्हें तो कोई रंग लगा ही नही सकता , ऊँचे कद वाला कोई दोस्त ही रंग लगा सकता है । मणि हाथी जरा शैतान है , अपनी सूंड में गन्दा पानी भरकर सबके ऊपर डाल देता है । तभी गीदड़ और लोमडी जंगल के राजा शेरखान के पास आ गए , और होली के बहाने दावत उडाने की योजना पर विचार करने लगे । पास ही एक झाड़ में छुप कर मन्नू खरगोश सारी बात सुन रहा था । उसे सिर्फ़ समझ आ रहा था कि गाय , नीलगाय ,हिरन का गोस्त ...तब उसे लगा कि यह कोई घिनोनी योजना बनाई जा रही है ।

मन्नू भागता हुआ मणि के पास गया , मन्नू खरगोश डर से काँप रहा था , मणि ने उसे पानी पिलाया फ़िर पूछा अब बता क्या हुआ ? मन्नू ने शेरखान वाली सारी बात बता दी । मणि बोला -तुम अब किसी से बात मत करना , मैं सब देख लूँगा । सभी जानवर एक खुले मैदान में एकत्र होने लगे और एक दूसरे को रंग डालने लगे , खाने के लिए रखी ढेर सारी मिठाई , कीडे , भंग ,सब चीजें मजे के साथ खाई जा रहीं थीं । हिरन के पास लोमडी आकार उसे भंग खिला रही थी , यह देखकर मणि ने , राजा बन्दर को उसके पास भेजा , जाओ और लोमडी को इतनी भंग पिला दो कि दो दिन तक उठ न सके ।

तभी गीदड़ नशे में आकार बोलने लगा - तुम सब , मानलो कितनी होली मनाना चाहते हो , शेरखान को आने दो तब पता चलेगा , तुम सब का नामोनिशान मिट जाएगा । नशे में सारी बातें जोर से कहने लगे , शेरखान के आने पर मणि ने होली कि बधाई दी , शेरखान धीरे से खरगोश की ओर बढ़ा तो मणि सामने आ गया , हिरन की ओर गया तो गैंडा आगे आ गया , लोमडी औरसियार नशे में धुत्त बोलते ही जा रहे थे । शेरखान समझ गया कि हमारी योजना ध्वस्त हो गई है । सभी बड़े जानवरों से होली मिलकर शेरखान वापस मांद में चला गया ।

सारे जानवर खुशिया मना रहे थे । दोनो दुष्ट दोस्तों को एक पेड के पास बाँध दिया था । सब एक साथ बोल रहे थे बुरा न मानो होली है ।

रेनू ....

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